कालाष्टमी: काल भैरव की उपासना का दिव्य दिन और भय से मुक्ति का आध्यात्मिक रहस्य

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की उपासना का अत्यंत पावन और शक्तिशाली दिन है। इस दिव्य तिथि पर काल भैरव की आराधना करने से भय, नकारात्मक शक्तियों और अशुभ कर्मों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुरक्षा, साहस और मानसिक स्थिरता का संचार होता है। उज्जैन की महाकाल परंपरा में काल भैरव को रक्षक देव के रूप में पूजा जाता है। Mahakal.com के माध्यम से की गई पूजा साधक को भगवान शिव की उग्र कृपा से जोड़ती है, जिससे जीवन में धर्म, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कालाष्टमी: काल भैरव की उपासना का दिव्य दिन और भय से मुक्ति का आध्यात्मिक रहस्य

कालाष्टमी: काल भैरव की उपासना का दिव्य दिन और भय से मुक्ति का आध्यात्मिक रहस्य

भूमिका

कालाष्टमी हिंदू पंचांग की एक अत्यंत शक्तिशाली तिथि है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। यह दिन भगवान काल भैरव, जो भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, को समर्पित होता है।
सनातन धर्म में कालाष्टमी को भय, नकारात्मक ऊर्जा और कर्म बंधनों से मुक्ति पाने का विशेष अवसर माना गया है। यह केवल व्रत नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और आत्मबल जाग्रत करने की साधना है।

कालाष्टमी क्या है?

“काल” का अर्थ है समय और “अष्टमी” का अर्थ है आठवीं तिथि।
अर्थात, कालाष्टमी वह दिन है जब समय के स्वामी काल भैरव की आराधना कर जीवन में अनुशासन, सुरक्षा और स्थिरता लाई जाती है।

भगवान काल भैरव : धर्म के रक्षक

काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा गया है। मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना काशी में कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता।
वे अज्ञान, भय और अधर्म का नाश करते हैं। उनकी पूजा से साधक को अदृश्य सुरक्षा कवच प्राप्त होता है।

कालाष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार का नाश किया, तब काल भैरव का प्राकट्य हुआ। तभी से वे धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के प्रतीक बने।
इसी कारण कालाष्टमी पर उनकी उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

कालाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व

कालाष्टमी का व्रत और पूजा करने से :

  • भय और मानसिक अस्थिरता से मुक्ति

  • नकारात्मक शक्तियों का नाश

  • अचानक आने वाली बाधाओं से रक्षा

  • कर्म दोष और ग्रह बाधाओं का शमन

  • आत्मबल और साहस की वृद्धि

यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो जीवन में असुरक्षा, डर या रुकावटों का सामना कर रहे हैं।

कालाष्टमी पर क्या करें (पूजा विधि) ?

कालाष्टमी सोमवार, 9 फरवरी 2026 को पड़ रही है। अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 फरवरी को सुबह 05:01 बजे से होगी और इसका समापन 10 फरवरी को सुबह 07:27 बजे होगा। कालाष्टमी पूजा का सबसे शुभ समय निशिता काल (मध्यरात्रि) माना जाता है, क्योंकि इस समय भगवान काल भैरव की उपासना विशेष फलदायी होती है। हालांकि, भक्तजन 9 फरवरी को पूरे दिन व्रत रखते हैं और पूजा-अनुष्ठान करते हैं, जिससे भय नाश, कर्म शुद्धि और दिव्य संरक्षण की प्राप्ति होती है।

  • भगवान काल भैरव का ध्यान व पूजन
  • “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप
  • काल भैरव अष्टकम का पाठ
  • काले तिल, सरसों का तेल या उड़द दाल का दान
  • सात्त्विक भोजन या उपवास

कालाष्टमी क्यों है आज के समय में भी प्रासंगिक?

आज के युग में जहाँ तनाव, भय और अनिश्चितता बढ़ रही है, वहाँ कालाष्टमी हमें सिखाती है कि बाहरी सुरक्षा से पहले आंतरिक शक्ति आवश्यक है।
काल भैरव की उपासना आत्मविश्वास, अनुशासन और साहस को जाग्रत करती है।

कालाष्टमी और साधना

कालाष्टमी विशेष रूप से साधकों, शिव भक्तों और तांत्रिक मार्ग पर चलने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और आत्मरक्षा की साधना का श्रेष्ठ अवसर है।

निष्कर्ष

कालाष्टमी हमें यह स्मरण कराती है कि जब जीवन में अंधकार, भय या भ्रम हो, तब धर्म, भक्ति और आत्मबल ही सच्चा मार्ग दिखाते हैं। भगवान काल भैरव की कृपा से जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

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कालाष्टमी के शुभ अवसर पर उज्जैन के विक्रांत भैरव मंदिर में यह दिव्य चढ़ावा करें।Mahakal.comके माध्यम से अर्पित यह पवित्र चढ़ावा भगवान काल भैरव की कृपा से भय से मुक्ति, कर्म शुद्धि, सुरक्षा और जीवन में साहस व स्थिरता प्रदान करता है।

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