प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, पूजा का समय, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
जानें प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा का समय, पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र और महत्व। भगवान गणेश की पूजा का सही समय और इस पावन व्रत के धार्मिक एवं आध्यात्मिक लाभ के बारे में विस्तार से जानें।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, पूजा का समय, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी क्या है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी, जिसे प्रद्युम्न चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र हिंदू व्रत और पर्व है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 'प्रद्युम्न' का अर्थ है परम तेजस्वी या दिव्य ज्ञान का प्रकाश, जबकि 'चतुर्थी' का अर्थ चंद्र मास का चौथा दिन है। इस शुभ व्रत को रखने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है तथा बुद्धि, समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा करने से नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 का व्रत गुरुवार, 18 जून 2026 को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करेंगे।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
विवरण |
समय |
तिथि |
18 जून 2026 |
दिन |
गुरुवार |
चतुर्थी तिथि प्रारंभ |
17 जून, रात्रि 09:38 बजे |
चतुर्थी तिथि समाप्त |
18 जून, शाम 06:58 बजे |
मध्याह्न पूजा मुहूर्त |
सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक |
व्रत का प्रकार |
सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक |
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने, सफलता, ज्ञान और जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से क्रोध, भ्रम और नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी की कथा
गणेश पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न का जन्म के कुछ समय बाद ही शंबरासुर नामक राक्षस ने अपहरण कर लिया था। उसकी मायावी शक्तियों के कारण प्रद्युम्न को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ऋषियों की सलाह पर प्रद्युम्न ने भगवान गणेश की आराधना की और चतुर्थी व्रत का पालन किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें दिव्य शक्ति और बुद्धि प्रदान की। इसके बाद प्रद्युम्न ने शंबरासुर का वध किया और अपने परिवार से पुनः मिलन किया। तभी से इस पावन व्रत को प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाने लगा।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 पूजा विधि
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान गणेश को जल, पुष्प, अक्षत, दूर्वा, धूप, दीप और मोदक अर्पित करें। प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी व्रत कथा या गणेश चालीसा का पाठ करें तथा अंत में गणेश जी की आरती करके पूजा का समापन करें। यदि संभव हो तो पूरे दिन व्रत रखें।
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प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल का महत्व
मध्याह्न काल भगवान गणेश की पूजा के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस समय की गई पूजा विशेष पुण्य फल प्रदान करती है और भगवान गणेश की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री सूची
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
- 21 दूर्वा
- मोदक
- लाल पुष्प
- पंचामृत
- नारियल
- चंदन
- कुमकुम और हल्दी
- घी का दीपक और कपूर
- पान के पत्ते और सुपारी
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी के शक्तिशाली मंत्र
गणेश मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
विघ्नेश्वर मंत्र
ॐ विघ्नेश्वराय नमः।
इन मंत्रों का जाप करने से सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पर क्या नहीं करना चाहिए?
- चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचें।
- भगवान गणेश को तुलसी अर्पित न करें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- पूजा में टूटे हुए चावल का प्रयोग न करें।
- पूजा के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को अकेला न छोड़ें।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का महत्व
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से शारीरिक, मानसिक और सांसारिक बाधाएं दूर होती हैं। यह व्रत मानसिक शांति, ज्ञान और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है तथा क्रोध और नकारात्मक विचारों को कम करने में सहायक माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 का व्रत गुरुवार, 18 जून 2026 को रखा जाएगा।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त क्या है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 का मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक रहेगा।
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का महत्व क्या है?
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने, जीवन की बाधाओं को दूर करने, बुद्धि, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
निष्कर्ष
प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी 2026 भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ पर्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत एवं पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
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