श्री गजलक्ष्मी माता – स्थायी समृद्धि, सौभाग्य और शुभता की अधिष्ठात्री देवी

श्री गजलक्ष्मी माता को समृद्धि, वैभव और शुभ कृपा की दिव्य प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वे देवी लक्ष्मी का एक शक्तिशाली स्वरूप हैं, जो स्थिर, धर्मपूर्ण और सतत धन का प्रतीक मानी जाती हैं। कमल पर विराजमान और दोनों ओर हाथियों से सुशोभित गजलक्ष्मी राजसी गरिमा, उर्वरता और आध्यात्मिक पवित्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी कृपा से भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आंतरिक संतुलन और सौहार्द प्राप्त होता है। गजलक्ष्मी माता की उपासना से आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। वे धर्म और विवेक से युक्त सौभाग्य प्रदान करती हैं। भक्त उनकी कृपा से दीर्घकालीन धन, शांति और शुभ आरंभ की कामना करते हैं।

श्री गजलक्ष्मी माता – स्थायी समृद्धि, सौभाग्य और शुभता की अधिष्ठात्री देवी

श्री गजलक्ष्मी माता – स्थायी समृद्धि, सौभाग्य और शुभता की अधिष्ठात्री देवी
परिचय
श्री गजलक्ष्मी माता, माता महालक्ष्मी का अत्यंत पावन और कल्याणकारी स्वरूप हैं, जो स्थिर धन, निरंतर समृद्धि, मान-सम्मान और शुभता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में इस स्वरूप को गजलक्ष्मी कहा गया है, जो अष्टलक्ष्मी के प्रमुख रूपों में से एक है। इनकी उपासना से केवल धन नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, शांति और स्थायित्व प्राप्त होता है।

श्री गजलक्ष्मी माता कौन हैं ?

श्री गजलक्ष्मी माता को कमल पर विराजमान दर्शाया जाता है, जिनके दोनों ओर गज (हाथी) पवित्र जल से उनका अभिषेक करते हैं। गज शक्ति, धैर्य, निरंतरता और राजसी वैभव के प्रतीक हैं, जबकि कमल पवित्रता और वैराग्य का संदेश देता है।
यह स्वरूप उस समृद्धि का प्रतीक है जो स्थिर, सम्मानजनक और धर्मसम्मत होती है।

गजलक्ष्मी स्वरूप का आध्यात्मिक महत्व

  • गज निरंतर प्रयास और स्थिरता का संकेत देते हैं।
  • प्रवाहित जल बाधा निवारण और अखंड कृपा का प्रतीक है।
  • कमल सांसारिक जीवन में रहकर भी पवित्र रहने का संदेश देता है।

यह स्वरूप सिखाता है कि सच्ची समृद्धि संयम और कृतज्ञता से प्राप्त होती है

श्री गजलक्ष्मी माता की पूजा क्यों करें ?

श्री गजलक्ष्मी माता की उपासना से:

  • आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।
  • व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में प्रगति होती है।
  • धन हानि और रुकावटों से रक्षा मिलती है।
  • गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और सम्मान बढ़ता है।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह पूजा विशेष रूप से गृहस्थों और कर्मशील भक्तों के लिए शुभ मानी जाती है।

पूजन के शुभ अवसर

  • दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन
  • शुक्रवार का दिन
  • पूर्णिमा तिथि
  • गृह प्रवेश एवं व्यापार आरंभ

इन अवसरों पर किया गया पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।

सरल एवं शुद्ध पूजा विधि

श्री गजलक्ष्मी माता की पूजा में:

  • कमल या ताजे पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
  • दीप-धूप और मंत्र जाप किया जाता है।
  • फल, मिष्ठान्न और श्रद्धापूर्वक चढ़ावा अर्पित किया जाता है।

इस पूजा का मूल भाव कृतज्ञता और श्रद्धा होता है, न कि लोभ।

निष्कर्ष

श्री गजलक्ष्मी माता की कृपा से जीवन में स्थायी समृद्धि, संतुलन और सौभाग्य का वास होता है। उनकी उपासना यह सिखाती है कि धन तभी कल्याणकारी होता है जब वह धर्म और संयम से जुड़ा हो। श्रद्धा और विश्वास से की गई उपासना जीवन को शुभता, शांति और सकारात्मकता से भर देती है।

जहाँ भक्ति बनती है वरदान – उज्जैन में श्री गजलक्ष्मी माता को श्री सूक्तम और चढ़ावा अर्पित कर स्थायी समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें | Mahakal.com

https://mahakal.com/epooja/shri-sukta-stotra-paath
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