आरती क्या है? जानिए आरती का महत्व, विधि, सही समय, नियम और प्रमुख आरतियां

आरती क्या है, आरती क्यों की जाती है और इसे सही तरीके से कैसे करें? जानिए आरती का धार्मिक महत्व, शुभ समय, पूजा विधि, आरती की थाली और प्रमुख देवी-देवताओं की आरतियां।

आरती क्या है? जानिए आरती का महत्व, विधि, सही समय, नियम और प्रमुख आरतियां

आरती क्या है? जानिए आरती का महत्व, सही विधि, समय, नियम और प्रमुख आरतियां

आरती हिंदू पूजा-पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा के दौरान दीपक या ज्योति को भगवान के सामने घुमाकर श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। आरती के साथ अक्सर भक्तिमय गीत या स्तुति भी गाई जाती है।

आरती केवल पूजा का अंतिम चरण नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त करने का एक माध्यम भी मानी जाती है।

इस लेख में जानिए आरती क्या है, आरती क्यों की जाती है, आरती करने का सही तरीका, आरती का शुभ समय, आरती की थाली में क्या रखें, आरती के नियम और प्रमुख देवी-देवताओं की लोकप्रिय आरतियां।

आरती क्या होती है?
आरती एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें दीपक, घी या तेल की ज्योति अथवा कपूर की लौ को देवी-देवता के सामने श्रद्धापूर्वक घुमाया जाता है। इसके साथ आरती के भजन या स्तुति का गायन किया जाता है।

घर की दैनिक पूजा से लेकर मंदिरों और विशेष धार्मिक अवसरों तक आरती की परंपरा अलग-अलग रूपों में देखने को मिलती है।

आरती क्यों की जाती है?
आरती का मुख्य भाव भक्ति, प्रार्थना, सम्मान और कृतज्ञता से जुड़ा है। दीपक की ज्योति को भगवान के सामने अर्पित करना भक्त की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

आरती के दौरान भक्त भगवान से परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

आरती का धार्मिक महत्व
आरती में प्रकाश का विशेष महत्व है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में प्रकाश को अंधकार से मुक्ति और ज्ञान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

आरती करते समय भक्त का ध्यान कुछ समय के लिए भगवान की ओर केंद्रित होता है। इससे पूजा में भक्ति और एकाग्रता का भाव बढ़ता है।

आरती के बाद कई परंपराओं में भक्त दीप की लौ के ऊपर हाथ ले जाकर उसे माथे से लगाते हैं।

आरती कब करनी चाहिए?
आरती का समय किसी एक नियम तक सीमित नहीं है। अलग-अलग मंदिरों, संप्रदायों और परिवारों में इसकी परंपरा अलग हो सकती है।

आम तौर पर आरती:

  • सुबह की पूजा के बाद
  • शाम की पूजा के समय
  • विशेष व्रत या पर्व पर
  • मंदिर की दैनिक पूजा में
  • विशेष धार्मिक अनुष्ठान के अंत में

की जाती है।

घर में आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सुबह या शाम आरती कर सकते हैं।

आरती की थाली में क्या रखें?
आरती की थाली को अपनी परंपरा के अनुसार सरल रखा जा सकता है।

सामान्य रूप से इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • दीपक
  • घी या तेल
  • कपूर
  • फूल
  • अक्षत
  • कुमकुम
  • चंदन
  • धूप

हर परिवार और क्षेत्र में आरती की थाली सजाने का तरीका अलग हो सकता है।

आरती करने की सरल विधि
आरती करने से पहले पूजा स्थान को साफ करें और भगवान के सामने दीपक जलाएं।

इसके बाद:

  1. भगवान का ध्यान करें।
  2. दीपक या आरती की ज्योति प्रज्वलित करें।
  3. संबंधित देवी-देवता की आरती गाएं।
  4. श्रद्धा के साथ ज्योति को भगवान के सामने घुमाएं।
  5. आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें।
  6. परिवार के सदस्यों को आरती की ज्योति ग्रहण करने दें।
  7. प्रसाद वितरित करें।

आरती की विशेष विधि परिवार और संप्रदाय की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

आरती के दौरान क्या ध्यान रखें?
आरती करते समय मन को शांत रखने का प्रयास करें।

केवल औपचारिकता के लिए आरती करने के बजाय भगवान के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

आरती के दौरान मोबाइल या अन्य distractions से बचकर पूजा पर ध्यान केंद्रित करना अच्छा माना जा सकता है।

प्रमुख देवी-देवताओं की लोकप्रिय आरतियां

भारत में अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए अनेक आरतियां प्रचलित हैं।

भगवान गणेश की आरती

“सुखकर्ता दुखहर्ता” गणेश जी की प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। गणेश चतुर्थी और दैनिक पूजा में भी गणेश आरती की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है।

भगवान विष्णु की आरती

“ॐ जय जगदीश हरे” सबसे प्रसिद्ध हिंदू आरतियों में से एक है और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी है।

भगवान शिव की आरती

महादेव की पूजा के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न शिव आरतियां और स्तुतियां गाई जाती हैं।

माता दुर्गा की आरती

नवरात्रि और देवी पूजा के दौरान माता दुर्गा की आरती विशेष रूप से की जाती है।

माता लक्ष्मी की आरती

दीपावली और लक्ष्मी पूजा के अवसर पर माता लक्ष्मी की आरती का विशेष महत्व माना जाता है।

हनुमान जी की आरती

मंगलवार और शनिवार सहित विभिन्न अवसरों पर भक्त हनुमान जी की आरती करते हैं।

शनिदेव की आरती

शनिवार को शनिदेव की पूजा के दौरान उनकी आरती और मंत्रों का पाठ भक्तों द्वारा किया जाता है।

आरती और भजन में क्या अंतर है?

आरती और भजन दोनों ही भक्ति से जुड़े हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य और धार्मिक संदर्भ अलग हो सकता है।

आरती में विशेष रूप से दीप या ज्योति भगवान के सामने अर्पित की जाती है और उसके साथ आरती का गायन होता है।

भजन सामान्य रूप से भगवान की स्तुति और भक्ति में गाया जाने वाला devotional song है।

कई पूजा और मंदिर परंपराओं में भजन के बाद आरती भी की जाती है।

क्या घर में रोज आरती कर सकते हैं?

हाँ, कई परिवारों में सुबह और शाम दैनिक पूजा के साथ आरती करने की परंपरा है।

हालांकि आरती कितनी बार करनी है, इसका कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है। यह परिवार, मंदिर और संप्रदाय की परंपरा पर निर्भर करता है।

आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती पूरी होने के बाद भगवान को प्रणाम करें और अपनी प्रार्थना करें।

इसके बाद कई परंपराओं में भक्त आरती की ज्योति को हाथों से ग्रहण करके माथे से लगाते हैं। प्रसाद हो तो उसे परिवार और अन्य भक्तों में बांटा जाता है।

निष्कर्ष
आरती हिंदू पूजा की एक सुंदर और भावपूर्ण परंपरा है। दीपक की ज्योति के माध्यम से भगवान के प्रति श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

चाहे वह गणेश जी की आरती हो, माता दुर्गा की आरती, शिव जी की आरती, लक्ष्मी जी की आरती या भगवान विष्णु की आरती—हर आरती के पीछे भक्तिभाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसलिए आरती करते समय केवल विधि पर ही नहीं, बल्कि मन की श्रद्धा और सकारात्मक भावना पर भी ध्यान देना चाहिए।

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