वट सावित्री व्रत 2026 : तिथि, पूजा मुहूर्त, कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

जानिए वट सावित्री व्रत 2026 की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व। इस पवित्र व्रत से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें और जानें अखंड सौभाग्य का महत्व। महाकाल.com ब्लॉग के माध्यम से पढ़ें वट सावित्री व्रत की पूरी जानकारी सरल और विस्तारपूर्वक। पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि हेतु यह विशेष लेख अवश्य पढ़ें।

वट सावित्री व्रत 2026 : तिथि, पूजा मुहूर्त, कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत 2026 : तिथि, पूजा मुहूर्त, कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में वट वृक्ष को अमरत्व, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।

साल 2026 में अधिक मास के कारण वट सावित्री व्रत की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यहां जानिए वट सावित्री व्रत 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, मंत्र और धार्मिक महत्व।

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कब है वट सावित्री व्रत 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 तिथि

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ – 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 17 मई 2026 को रात 01:30 बजे
  • वट सावित्री व्रत – 16 मई 2026, शनिवार

वट सावित्री व्रत 2026 पूजा मुहूर्त

पूजा का श्रेष्ठ समय

  • सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त – 11:50 बजे से 12:45 बजे तक

अन्य शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:07 बजे से 04:48 बजे तक
  • विजय मुहूर्त – दोपहर 02:04 बजे से 03:28 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त – शाम 07:04 बजे से 07:25 बजे तक

वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु, माता सावित्री और वट वृक्ष की पूजा करती हैं।

मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से :

  • पति की आयु लंबी होती है
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है
  • परिवार में सुख-शांति आती है
  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है

वट सावित्री व्रत कथा (संक्षिप्त कथा)

वट सावित्री व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री का विवाह सत्यवान नामक राजकुमार से हुआ था। महर्षि नारद ने पहले ही बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी।

निर्धारित दिन सत्यवान जंगल में लकड़ी काटते समय बरगद के पेड़ के नीचे बेहोश होकर गिर पड़े। तभी यमराज उनके प्राण लेने आए। सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म, बुद्धिमानी और अटूट प्रेम से यमराज को प्रसन्न कर दिया। यमराज ने सावित्री को कई वरदान दिए और अंत में सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया।

यह कथा पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण, निष्ठा और स्त्री शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

वट सावित्री व्रत पूजा विधि

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. स्वच्छ और पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
  3. पूजा की सामग्री तैयार करें।
  4. वट वृक्ष या मंदिर में जाकर पूजा करें।
  5. बरगद के पेड़ पर जल, रोली, फूल और फल अर्पित करें।
  6. दीपक और धूप जलाएं।
  7. कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की सात परिक्रमा करें।
  8. वट सावित्री व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  9. पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
  10. अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

वट सावित्री व्रत मंत्र

   अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
   पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
   यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
   तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च समृद्धिं कुरु मा सदा।।

वट सावित्री व्रत के लाभ

  • पति की लंबी आयु की प्राप्ति
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ना
  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि
  • मानसिक और आध्यात्मिक शांति
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

निष्कर्ष

वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण, विश्वास और स्त्री शक्ति का प्रतीक है। माता सावित्री की कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। श्रद्धा और विधिपूर्वक किया गया यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

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