कालाष्टमी मई 2026 : तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व
कालाष्टमी मई 2026 भगवान काल भैरव को समर्पित अत्यंत पवित्र पर्व है। जानिए कालाष्टमी की सही तिथि, अष्टमी तिथि का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत मंत्र, धार्मिक महत्व और भगवान काल भैरव की उपासना से मिलने वाले दिव्य लाभ। काल भैरव पूजा से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से जानें Mahakal.com के माध्यम से।
कालाष्टमी मई 2026 : तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व
परिचय
कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली तिथि मानी जाती है। भगवान काल भैरव, भगवान शिव का उग्र एवं रक्षक स्वरूप हैं। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं तथा भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन मासिक कालाष्टमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
मई 2026 की कालाष्टमी पर देशभर के श्रद्धालु भगवान काल भैरव की पूजा करके साहस, सुरक्षा, आध्यात्मिक शक्ति और जीवन की कठिनाइयों से राहत प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।
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कालाष्टमी मई 2026 तिथि एवं शुभ मुहूर्त
कालाष्टमी मई 2026 कब है?
कालाष्टमी का व्रत रविवार, 10 मई 2026 को रखा जाएगा।
अष्टमी तिथि प्रारंभ
09 मई 2026 – दोपहर 02:02 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त
10 मई 2026 – दोपहर 03:06 बजे
निशिता काल / मध्यरात्रि पूजा मुहूर्त
रात्रि 11:55 बजे से 12:40 बजे तक
कालाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व
कालाष्टमी भगवान काल भैरव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। भगवान काल भैरव को समय के रक्षक, नकारात्मक शक्तियों के विनाशक और भक्तों के संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा भय, ग्रह दोष, नकारात्मक प्रभाव और जीवन की बाधाओं को दूर करती है।
भक्तों का विश्वास है कि भगवान भैरव अपने उपासकों को प्रदान करते हैं :
- नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
- भय और चिंता से मुक्ति
- साहस और आत्मविश्वास
- कठिन परिस्थितियों में सफलता
- आध्यात्मिक उन्नति एवं दिव्य कृपा
इस दिन भक्त भैरव मंदिरों में जाकर दीपक, काले तिल, पुष्प और विशेष पूजा अर्पित करते हैं।
कालाष्टमी पूजा विधि
प्रातः स्नान एवं संकल्प
सुबह स्नान करके श्रद्धापूर्वक कालाष्टमी व्रत का संकल्प लें।
भगवान शिव एवं काल भैरव की पूजा
पूजा में अर्पित करें :
- सरसों के तेल का दीपक
- काले तिल
- नारियल
- फूल एवं माला
- धूप एवं भोग
पवित्र मंत्रों का जाप
इन मंत्रों का जाप करें :
- “ॐ कालभैरवाय नमः”
- काल भैरव अष्टकम
- शिव चालीसा या रुद्राष्टकम
कालाष्टमी व्रत मंत्र
शिवपुराण के अनुसार भगवान काल भैरव की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है:
"अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्।
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुमर्हसि॥"
मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं तथा भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कुत्तों को भोजन कराना
कालाष्टमी के दिन काले कुत्तों को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि कुत्ता भगवान भैरव का वाहन माना जाता है
रात्रि जागरण एवं भजन
कई भक्त रात्रि में जागरण करते हैं, भजन-कीर्तन, ध्यान एवं विशेष पूजा में भाग लेते हैं।
कालाष्टमी व्रत के लाभ
- नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर होता है
- शत्रु एवं बाधाओं से मुक्ति मिलती है
- मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है
- आध्यात्मिक अनुशासन मजबूत होता है
- भगवान भैरव की दिव्य कृपा और सुरक्षा प्राप्त होती है
निष्कर्ष
कालाष्टमी मई 2026 भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने, साहस बढ़ाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन व्रत, मंत्र जाप और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को दिव्य सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
भगवान काल भैरव सभी भक्तों को सुख, सुरक्षा, ज्ञान और शक्ति प्रदान करें।
ॐ कालभैरवाय नमः।
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