बटुक भैरव जयंती 2026: तिथि, मुहूर्त, पूजा मंत्र और भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल रूप की कथा

जानें बटुक भैरव जयंती 2026 की तिथि, दशमी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा मंत्र, महत्व, पौराणिक कथा और भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल स्वरूप की कहानी। जानें बटुक भैरव की पूजा से मिलने वाले भयमुक्त जीवन, शत्रु बाधा से रक्षा, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लाभ।

बटुक भैरव जयंती 2026: तिथि, मुहूर्त, पूजा मंत्र और भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल रूप की कथा

बटुक भैरव जयंती 2026: तिथि, मुहूर्त, पूजा मंत्र और भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल रूप की कथा

परिचय

बटुक भैरव जयंती भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल स्वरूप भगवान बटुक भैरव को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है। बटुक भैरव को महादेव का पूर्णावतार (पूर्ण अवतार) माना जाता है। उनकी पूजा भय, नकारात्मक शक्तियों और शत्रु बाधाओं से रक्षा, सुख-शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति के लिए की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने दैत्य आपद (आपदा) के अत्याचारों से संसार की रक्षा करने के लिए बटुक भैरव के रूप में अवतार लिया था। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन बटुक भैरव की उपासना करने से साहस, ज्ञान, सम्मान और दिव्य कृपा प्राप्त होती है।

बटुक भैरव जयंती 2026 कब है?

वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती बुधवार, 24 जून 2026 को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाई जाएगी।

बटुक भैरव जयंती 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त

कार्यक्रम

तिथि एवं समय

बटुक भैरव जयंती

24 जून 2026

दशमी तिथि प्रारंभ

23 जून 2026, शाम 04:40 बजे

दशमी तिथि समाप्त

24 जून 2026, शाम 06:18 बजे

हवन मुहूर्त

24 जून 2026, प्रातः 05:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक

बटुक भैरव जयंती क्यों मनाई जाती है?

बटुक भैरव जयंती भगवान शिव के बाल स्वरूप बटुक भैरव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, दैत्य आपद को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसे कोई देवता, देवी या मनुष्य नहीं मार सकता था। केवल पांच वर्ष का बालक ही उसका वध कर सकता था।

जब उसके अत्याचारों से तीनों लोक त्रस्त हो गए, तब भगवान शिव ने पांच वर्षीय बालक के रूप में अवतार लेकर दैत्य का संहार किया और संसार में पुनः शांति स्थापित की। इसी दिव्य घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है।

बटुक भैरव जयंती का महत्व

बटुक भैरव जयंती का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

  • बटुक भैरव, भैरव के सौम्य और सात्विक स्वरूप माने जाते हैं।
  • उनकी उपासना से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
  • भक्तों का विश्वास है कि बटुक भैरव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
  • काल भैरव की तुलना में बटुक भैरव की पूजा घर पर भी सरलता से की जा सकती है।
  • यह दिन विशेष रूप से तांत्रिकों, अघोरियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • उनकी कृपा से सुख, शांति, ज्ञान, सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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बटुक भैरव जयंती की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में आपद नामक एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था। कठोर तपस्या के बल पर उसने ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई देवता, देवी या मनुष्य नहीं मार सकता था। केवल पांच वर्ष का बालक ही उसका वध कर सकता था।

इस वरदान के प्रभाव से आपद ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया। देवता, ऋषि और मनुष्य उसके अत्याचारों से पीड़ित होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे।

तब भगवान शिव ने सभी देवताओं की शक्तियों के साथ पांच वर्षीय बालक के रूप में अवतार लिया, जिन्हें बटुक भैरव कहा गया। बाल रूप में होने के बावजूद वे अद्भुत दिव्य शक्तियों से संपन्न थे।

भगवान बटुक भैरव और दैत्य आपद के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें अंततः भगवान बटुक भैरव ने दैत्य का संहार कर तीनों लोकों में शांति और धर्म की पुनः स्थापना की।

इसी दिव्य घटना की स्मृति में बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है।

भगवान बटुक भैरव के पूजा मंत्र

बटुक भैरव बीज मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ॥

बटुक भैरव मंत्र

ॐ बटुकाय नमः

भैरव गायत्री मंत्र

ॐ कालकालाय विद्महे कालातीताय धीमहि।
तन्नो भैरवः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का नियमित जप भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

भयमुक्त जीवन के लिए विशेष साधना

इस दिन साधक "बटुक भैरव कवच" और "आपदुद्धारण स्तोत्र" का पाठ करते हैं। तंत्र साधना में रुचि रखने वाले लोग रात्रि के समय विशेष मंत्र जाप भी करते हैं।

इस साधना के विशेष फल

  • शत्रु बाधा से मुक्ति: ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं से रक्षा होती है।
  • अकाल मृत्यु से सुरक्षा: रोग, दुर्घटना और आकस्मिक संकटों से बचाव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मानसिक शक्ति और साहस: बच्चों तथा विद्यार्थियों के लिए यह पूजा एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जाती है।

बटुक भैरव की पूजा के आध्यात्मिक लाभ

बटुक भैरव की आराधना से—

  • भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • शत्रुओं और दुष्प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • सुख, शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • ज्ञान, बुद्धि और सम्मान की प्राप्ति होती है।
  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
  • आकस्मिक संकटों और अनिष्ट से रक्षा होती है।

निष्कर्ष

बटुक भैरव जयंती भगवान शिव के पांच वर्षीय बाल स्वरूप के प्राकट्य का पावन पर्व है। यह पर्व धर्म की अधर्म पर विजय, भय से मुक्ति और दिव्य संरक्षण का प्रतीक है।

भगवान बटुक भैरव की उपासना और उनके पवित्र मंत्रों का जप करने से भक्तों को भयमुक्त जीवन, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बटुक भैरव जयंती 2026 कब है?

वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती 24 जून 2026 को मनाई जाएगी।

2. बटुक भैरव जयंती क्यों मनाई जाती है?

यह भगवान शिव के बटुक भैरव रूप के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है, जब उन्होंने पांच वर्षीय बालक का रूप धारण कर दैत्य आपद का वध किया था।

3. बटुक भैरव की पूजा करने से क्या लाभ होते हैं?

उनकी पूजा से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा सुख, शांति, समृद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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