संक्रांति पर स्नान-दान क्यों है अनिवार्य? | धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व

संक्रांति का दिन सूर्य के राशि परिवर्तन का विशेष पर्व है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन किया गया स्नान और दान व्यक्ति के पापों का शमन करता है, ग्रह दोषों को शांत करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। धार्मिक ग्रंथों, ज्योतिषीय मान्यताओं और आध्यात्मिक दृष्टि से संक्रांति पर स्नान-दान को मोक्ष, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग बताया गया है।

संक्रांति पर स्नान-दान क्यों है अनिवार्य? | धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व

भूमिका

सनातन धर्म में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का महापर्व है। शास्त्रों में इस दिन स्नान और दान को अनिवार्य बताया गया है, क्योंकि यह तिथि सूर्य की विशेष गति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी होती है।

1. सूर्य के उत्तरायण होने का पुण्य काल

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं।
धर्मग्रंथों के अनुसार:

  • उत्तरायण काल देवताओं का दिन माना जाता है
  • इस समय किया गया पुण्य अक्षय फल देता है

इसी कारण संक्रांति पर स्नान-दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

2. पाप क्षय और आत्मशुद्धि का माध्यम

शास्त्रों में कहा गया है कि:

  • संक्रांति पर नदी, सरोवर या तीर्थ स्नान करने से
  • जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है

स्नान के बाद किया गया दान:

  • मन, शरीर और कर्म – तीनों को शुद्ध करता है
  • व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है

3. दान से ग्रह दोष और दरिद्रता का नाश

संक्रांति पर किया गया दान विशेष रूप से: - सूर्य दोष, पितृ दोष, दरिद्र योग के निवारण में सहायक माना गया है। 

दान योग्य वस्तुएँ:

  • तिल
  • गुड़
  • अन्न
  • खिचड़ी
  • वस्त्र
  • गौ-दान

यही कारण है कि संक्रांति पर दान को अनिवार्य कहा गया है।

4. ज्योतिषीय दृष्टि से संक्रांति स्नान-दान

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार:

  • सूर्य आत्मा और कर्म के कारक हैं
  • संक्रांति पर सूर्य पूजा, स्नान और दान से
  • आत्मबल बढ़ता है
  • मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है

विशेषकर कमजोर सूर्य वाली कुंडली में यह उपाय अत्यंत फलदायी है।

5. पितृ शांति और मोक्ष का मार्ग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • संक्रांति पर किया गया दान
  • पितरों तक पहुँचता है
  • पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है

इसी कारण इस दिन:

  • तर्पण
  • ब्राह्मण भोजन
  • अन्न दान को श्रेष्ठ माना गया है।

निष्कर्ष

संक्रांति पर स्नान-दान इसलिए अनिवार्य है, क्योंकि यह दिन:

  • आत्मशुद्धि
  • पाप नाश
  • ग्रह दोष शांति
  • पितृ तृप्ति और अक्षय पुण्य का अद्भुत संगम है।

यदि आप संक्रांति पर शास्त्रोक्त विधि से स्नान, दान या पूजा करवाना चाहते हैं, तो यह कार्य Mahakal.com के माध्यम से अनुभवी पंडितों द्वारा करवाया जा सकता है।

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सूर्य मंत्र जाप

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