गुरुवायूर एकादशी व्रत: महत्व, अनुष्ठान और भक्ति

गुरुवायूर एकादशी व्रत केरल के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर में मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें भक्त उपवास, पूजा, और हाथी केसवन का सम्मान करते हैं।

गुरुवायूर एकादशी व्रत: महत्व, अनुष्ठान और भक्ति

गुरुवायूर एकादशी केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर में मनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है। यह श्री कृष्ण भगवान को समर्पित है और मलयालम महीने वृश्चिकम के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है।

गुरुवायूर एकादशी का महत्व

यह व्रत भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को भगवद गीता उपदेशित करने की स्मृति में मनाया जाता है। इसे मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी भी कहा जाता है, जो पापों का नाश करती है और भक्तों को शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति देती है।

व्रत कैसे करें?

भक्तगण इस दिन सूर्योदय से पहले उपवास प्रारंभ करते हैं और दिनभर अनाज, मांसाहार एवं अशुद्ध वस्तुएं त्याग कर भगवान की भक्ति करते हैं। मंदिर में विशेष पूजा और हवन किया जाता है।

मंदिर में होने वाले प्रमुख अनुष्ठान

गुरुवायूर मंदिर में इस दिन नर्मल्याराधना, उडयस्थमाना पूजा, चंदनाभिषेक और भगवान के भव्य भजन-कीर्तन होते हैं। मंदिर के प्रसिद्ध हाथी गजराजन केसवन का सम्मान भी किया जाता है।

भगवान कृष्ण का गीता उपदेश

इस दिन भगवद गीता के श्लोकों का पाठ किया जाता है, जो जीवन में धर्म और कर्म का संदेश देता है। यह व्रत भक्तों को भगवान से निकटता और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है।

सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव

गुरुवायूर एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि एक भव्य सांस्कृतिक महोत्सव भी है जिसमें भक्त हर्षोल्लास के साथ भाग लेते हैं। हाथियों की शोभा यात्रा, भजन संध्या और सामाजिक सौहार्द की भावना इस उत्सव की विशेषता है।

गुरुवायूर एकादशी व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शुद्धि और भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है। यह व्रत उन सभी के लिए है जो अपने जीवन में शांति, समृद्धि एवं मोक्ष की आकांक्षा रखते हैं।

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