चंद्र दर्शन 2025: महत्व, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ

चंद्र दर्शन 2025: अमावस्या के बाद प्रथम चंद्रदर्शन मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और नकारात्मकता से मुक्ति देता है। सरल पूजा-विधि और मंत्रों के साथ इस पावन दिन पर सौभाग्य व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

चंद्र दर्शन 2025: महत्व, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ

चंद्र दर्शन हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन से जुड़ा हुआ है। यह दिन मानसिक शांति, सौभाग्य और समृद्धि प्राप्ति का आधार माना जाता है। पुराणों में भी चंद्रदेव की पूजा का विशेष स्थान है।

चंद्र दर्शन का महत्व

  • शास्त्रों में चंद्रमा को मन और भावनाओं का स्वामी माना गया है।

  • चंद्र दर्शन का उपवास जीवन की नकारात्मकताओं को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

  • यह दिन उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जिनकी कुंडली में चंद्रमा दुर्बल हो।

पूजा विधि

  • दिनभर उपवास रखें और साफ-सुथरे सफेद वस्त्र पहनें।

  • चंद्रमा प्रकट होते ही स्नान कर पूजा स्थल पर जाएं।

  • चंद्र देव को दूध, जल, सफेद फूल, तिल, और खीर अर्पित करें।

  • “ॐ चंद्राय नमः” या “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें।

  • जल अर्घ्य के साथ चंद्रमा की पूजा करें और मन की शांति की प्रार्थना करें।

  • उपवास समाप्त करें और दान-पुण्य करें।

आध्यात्मिक और ज्योतिषीय लाभ

  • मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन दूर होता है।

  • जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और सुख-शांति आती है।

  • चंद्र दोष शांत होते हैं और कुंडली की स्थिति सुधरती है।

चंद्र दर्शन का यह पर्व आध्यात्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम है। इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाना चाहिए ताकि इसके फल सर्वाधिक प्राप्त हों।

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