शनि देव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है? | आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और कर्मिक कारण
शनि देव को केवल तेल—विशेषकर सरसों का तेल—क्यों अर्पित किया जाता है? जानिए शास्त्र, पुराण और वैदिक ज्योतिष के अनुसार तेल चढ़ाने का आध्यात्मिक और कर्मिक महत्व तथा शनि दोष में इसके प्रभाव।
प्रस्तावना
शनि देव से जुड़ा सबसे आम प्रश्न है — शनि देव को तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है ?
अन्य देवताओं की तरह फूल, मिठाई या फल क्यों नहीं? शनिवार, साढ़ेसाती, शनि दोष—हर जगह तेल का ही महत्व क्यों है? यह परंपरा अंधविश्वास नहीं, बल्कि शास्त्र, पुराण और ज्योतिष विज्ञान पर आधारित है।
शनि देव कौन हैं?
शनि देव कर्मफल दाता हैं। वे न तो पक्षपाती हैं और न ही क्रूर— वे केवल आपके कर्मों का परिणाम देते हैं।
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ग्रह: शनि
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तत्व: अनुशासन, न्याय, धैर्य
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प्रभाव: संघर्ष, विलंब, आत्मशुद्धि
शनि देव को तेल चढ़ाने का वास्तविक कारण
1. तेल कष्ट और घर्षण को कम करता है
तेल का गुण है—घर्षण कम करना। शनि जीवन में दबाव, संघर्ष और पीड़ा लाते हैं।
तेल अर्पण का अर्थ है—
- कष्ट की तीव्रता कम हो
- कर्म का भार हल्का हो
2. शनि की ऊर्जा को संतुलित करता है
शनि ठंडे, भारी और धीमे ग्रह हैं। सरसों का तेल गर्म और स्थिरता देने वाला होता है। यह तेल शनि की कठोर ऊर्जा को शांत करता है।
3. पौराणिक मान्यता
पुराणों के अनुसार जब शनि देव पीड़ा में थे, उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें राहत मिली। तब उन्होंने वरदान दिया कि जो भक्त श्रद्धा से तेल अर्पित करेगा, उसे कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
4. तेल अहंकार नहीं, विनम्रता दर्शाता है
शनि देव सादगी पसंद करते हैं। तेल साधारण है— पर प्रभावशाली। यह भक्ति नहीं, समर्पण का प्रतीक है।
सरसों का तेल ही क्यों?
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गर्म प्रकृति।
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नकारात्मक ऊर्जा शोषित करता है।
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शनि-मंगल संतुलन बनाता है।
इसलिए शनिवार को सरसों के तेल का विशेष महत्व है।
तेल चढ़ाने की सही विधि
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दिन : शनिवार
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समय : सायंकाल
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मंत्र : ॐ शं शनैश्चराय नमः
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भाव : विनम्रता और मौन
तेल चढ़ाने से क्या लाभ होते हैं?
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साढ़ेसाती का प्रभाव कम
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धन और करियर की बाधा में राहत
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मानसिक तनाव में कमी
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कर्म दोष का शमन
निष्कर्ष
तेल शनि देव को इसलिए नहीं चढ़ाया जाता कि वे कष्ट देते हैं। तेल इसलिए अर्पित किया जाता है क्योंकि शनि देव अनुशासन के माध्यम से जीवन में परिवर्तन सिखाते हैं। जब आप शनि देव को तेल चढ़ाते हैं, तो आप मौन रूप से यह स्वीकार करते हैं— “मैं अपने कर्मों को स्वीकार करता हूँ, कृपया मुझे उन्हें सहने की शक्ति प्रदान करें।”
शनि देव सुख-सुविधाओं का आशीर्वाद नहीं देते, बल्कि वे विकास, स्थिरता और आध्यात्मिक परिपक्वता का वरदान प्रदान करते हैं।
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