ब्रह्मेश्वर महादेव (65/84 शिवलिंग) उज्जैन – महत्व, पूजन विधि और आस्था

उज्जैन के 84 महादेव में से 65वें ब्रह्मेश्वर महादेव के दर्शन का महत्व जानें। यहाँ की कथा, पूजन विधि और धार्मिक लाभ के बारे में पढ़ें और महाकाल नगरी की दिव्यता का अनुभव करें।

ब्रह्मेश्वर महादेव (65/84 शिवलिंग) उज्जैन – महत्व, पूजन विधि और आस्था

उज्जैन, जिसे भगवान महाकाल की नगरी कहा जाता है, शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहाँ 84 महादेव के दर्शन का अद्वितीय महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु पूरे 84 महादेव के दर्शन कर लेता है, वह मोक्ष का अधिकारी बनता है। इन्हीं में से एक पवित्र स्थान है – ब्रह्मेश्वर महादेव, जो 65वां शिवलिंग है।

ब्रह्मेश्वर महादेव का धार्मिक महत्व

ब्रह्मेश्वर महादेव का संबंध सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी और भगवान शिव से माना जाता है। मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, तब भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप प्रकट होकर यह स्थान प्रदान किया। इसलिए इस मंदिर का नाम ब्रह्मेश्वर पड़ा।
भक्तों का विश्वास है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से बुद्धि का विकास होता है, कार्यों में सफलता मिलती है और पापों का नाश होता है।

पूजन एवं अनुष्ठान

  • भक्त प्रातःकाल स्नान कर यहाँ शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, अक्षत और धतूरा चढ़ाते हैं।

  • सोमवार और मासिक शिवरात्रि को विशेष पूजा का आयोजन होता है।

  • श्रावण मास और महाशिवरात्रि के समय यहाँ विशेष भीड़ रहती है।

आस्था और लाभ

  • ब्रह्मेश्वर महादेव के दर्शन करने से जीवन में स्थिरता आती है।

  • विद्यार्थियों को ज्ञान और एकाग्रता की प्राप्ति होती है।

  • गृहस्थ जीवन में शांति और समृद्धि बनी रहती है।

  • 84 महादेव यात्रा के दौरान यह स्थान भक्तों को आत्मिक ऊर्जा और संतोष प्रदान करता है।

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