स्कंदा षष्ठी 2025: भगवान कार्तिकेय को समर्पित पावन त्योहार
स्कंदा षष्ठी 2025 में भगवान कार्तिकेय की विजय का पर्व मनाएं। जानें पूजा विधि, व्रत नियम और पर्व की खास बातें।
स्कंदा षष्ठी (Skanda Sashti) हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत और तमिलनाडु क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान कार्तिकेय (जिसे भगवान मुरुगन, सुब्रह्मण्यम भी कहते हैं) की विजय और शक्ति का प्रतीक है। स्कंदा षष्ठी शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को आती है और इसका विशेष महत्व अयप्पा मंदिरों के अलावा तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में है।
2025 में स्कंदा षष्ठी की तिथि और मुहूर्त
2025 में यह पर्व अक्टूबर के महीने में 27 अक्टूबर को विशेष रूप से मनाया जाएगा, जिसे सूर सम्हारम के रूप में जाना जाता है। इस दिन भगवान मुरुगन ने राक्षस सुरपद्मन का संहार किया था। यह दिन शुभ मुहूर्त में मनाया जाता है, जिसमें भक्त पूर्ण उपवास रखते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ करते हैं।
स्कंदा षष्ठी का महत्व
स्कंदा षष्ठी का धार्मिक महत्व भगवान मुरुगन की अच्छाई की बुराई पर विजय के रूप में समझा जाता है। यह पर्व बुराइयों का नाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। भक्त इस दिन भगवान की प्रार्थना कर अपने जीवन से सभी बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं। इस व्रत को करने से आत्मिक शक्ति और साहस भी प्राप्त होता है।
पूजन और अनुष्ठान
-
उपवास: भक्त सुबह से लेकर शाम तक निर्जला व्रत रखते हैं या फलाहार करते हैं।
-
मंदिर दर्शन: सुबह मंदिर जाकर भगवान कार्तिकेय की आराधना करते हैं।
-
स्कंद पुराण का पाठ: इस दिन स्कंद पुराण और स्कंदा षष्ठी कवच का पाठ विशेष लाभकारी माना जाता है।
-
सूर सम्हारम उत्सव: शाम को भगवान की विजय कथा का मंचन किया जाता है, जिसमें सुरपद्मन राक्षस का संहार दिखाया जाता है।
-
दीपाराधना और आरती: पूजा के अंतिम चरण में दीप प्रज्ज्वलित करके आरती की जाती है।
व्रत के लाभ
-
बुरी शक्तियों से रक्षा मिलती है।
-
मानसिक स्थिरता और ऊर्जा का संचार होता है।
-
जीवन में obstacles खत्म होते हैं और सफलता मिलती है।
-
भगवान कार्तिकेय की कृपा से स्वास्थ्य, संपत्ति और सौभाग्य बढ़ता है।
What's Your Reaction?