ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 : जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और दान का महत्व
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 की संपूर्ण जानकारी जैसे सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, भगवान विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा, दान का महत्व, आध्यात्मिक लाभ और पुरुषोत्तम मास के धार्मिक अनुष्ठानों के बारे में विस्तार से जानें Mahakal.com Blogs के माध्यम से, जहाँ आपको सनातन धर्म, पूजा-व्रत, आध्यात्मिक ज्ञान और हिंदू पर्वों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में प्राप्त होती है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 : जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और दान का महत्व
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र, शुभ और पुण्यदायी माना गया है। यह दिन विशेष रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित होता है। जब पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास अर्थात अधिक मास में आती है, तब इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
लगभग ढाई से तीन वर्षों में एक बार आने वाला यह दुर्लभ संयोग साधना, भक्ति, दान-पुण्य, उपवास और आत्मशुद्धि का अनुपम अवसर प्रदान करता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण और भविष्य पुराण में अधिक मास की पूर्णिमा को “सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा” कहा गया है, अर्थात ऐसी पूर्णिमा जो सभी सिद्धियों और पुण्य फलों को प्रदान करने वाली मानी गई है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा रविवार, 31 मई 2026 को मनाई जाएगी।
यह पावन पूर्णिमा “पुरुषोत्तम पूर्णिमा” के नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास में पड़ती है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
महत्वपूर्ण समय
- पूजा का शुभ समय: सुबह 7:08 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक
- चंद्रोदय समय: शाम 7:21 बजे से 7:36 बजे के बीच (लगभग)
- पूर्णिमा उपवास: 30 मई 2026 (उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए)
इस दिन भगवान विष्णु के साथ चंद्र देव की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। इससे मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
अधिक मास पूर्णिमा का महत्व क्यों है विशेष?
अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है। इसलिए इस मास में आने वाली पूर्णिमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल देने वाली मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है।
- अधिक पूर्णिमा का व्रत अनेक यज्ञों के समान पुण्य प्रदान करता है।
- इस दिन दान और भक्ति करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
- सत्यनारायण कथा सुनने और कराने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- ध्यान और मंत्र जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन का कारक होता है, इसलिए पूर्णिमा के दिन पूजा और ध्यान करने से मन शांत और स्थिर होता है।
पुरुषोत्तम पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
“पुरुषोत्तम” भगवान विष्णु का एक पवित्र नाम है जिसका उल्लेख विष्णु सहस्रनाम में मिलता है। इसका अर्थ है “सर्वश्रेष्ठ पुरुष” या “परम दिव्य सत्ता”।
मान्यता है कि अधिक मास पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा करने से:
- नकारात्मक कर्म समाप्त होते हैं
- दिव्य कृपा प्राप्त होती है
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है
- परिवार में सुख-शांति आती है
- आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है
इस दिन कई मंदिरों में भजन-कीर्तन, सत्संग, विष्णु पूजा और सत्यनारायण कथा का आयोजन किया जाता है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा-विधि
पूजा करने की संपूर्ण विधि
1. प्रातः स्नान करें
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगा, नर्मदा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें अथवा गंगाजल मिश्रित जल का उपयोग करें।
2. पूजा स्थल की सफाई करें
घर के मंदिर और पूजा स्थल को साफ करके फूलों और दीपकों से सजाएं।
3. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्थापना करें
एक चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
4. पूजन सामग्री अर्पित करें
भगवान को अर्पित करें:
- तुलसी दल
- पीले पुष्प
- फल
- धूप-दीप
- घी का दीपक
- नैवेद्य
5. मंत्र जाप और पाठ करें
- विष्णु सहस्रनाम
- विष्णु चालीसा
- सत्यनारायण कथा
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
6. आरती करें
घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें।
7. दान-पुण्य करें
गरीबों, ब्राह्मणों, असहाय लोगों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अन्न और धन का दान करें।
अधिक पूर्णिमा पर दान का महत्व
सनातन धर्म में दान को कलियुग का सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना गया है। पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर किया गया दान अनेक गुना फल प्रदान करता है।
अधिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?
- अन्नदान
- वस्त्रदान
- चावल
- दूध
- दही
- चीनी
- सफेद वस्त्र
- गौदान (प्रतीकात्मक रूप से)
- ब्राह्मणों को दक्षिणा
- 33 मालपुओं का दान
मान्यता है कि सफेद वस्तुओं का दान करने से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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दान का महत्व बताने वाला शास्त्रीय श्लोक
संस्कृत श्लोक
सुक्षेत्रे वापयेद्बीजं सुपात्रे निक्षिपेद्धनम्।
सुक्षेत्रे च सुपात्रे च ह्युप्तं दत्तं न नश्यति॥
अर्थ
जिस प्रकार अच्छे खेत में बोया गया बीज कभी व्यर्थ नहीं जाता, उसी प्रकार योग्य व्यक्ति को दिया गया दान भी सदैव पुण्य फल प्रदान करता है।
पुरुषोत्तम मास में वृक्षारोपण का महत्व
विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास में पवित्र वृक्ष लगाने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।
अधिक पूर्णिमा पर लगाए जाने वाले पवित्र वृक्ष
- पीपल
- वट वृक्ष
- तुलसी
- आंवला
- बेलपत्र वृक्ष
- कदंब
- अशोक
- गूलर
इन वृक्षों को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। इनके रोपण से पर्यावरण संरक्षण के साथ आध्यात्मिक पुण्य भी प्राप्त होता है।
पूर्णिमा के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
अधिक पूर्णिमा पर अधिक पुण्य प्राप्त करने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- तामसिक भोजन से दूर रहें
- क्रोध और विवाद से बचें
- नकारात्मक विचार न रखें
- कटु वचन न बोलें
- मांसाहार और नशे से दूर रहें
इसके स्थान पर:
- भजन-कीर्तन करें
- ध्यान करें
- मंत्र जाप करें
- धार्मिक ग्रंथ पढ़ें
- जरूरतमंदों की सहायता करें
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र, शुभ और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण पर्व है। पुरुषोत्तम मास में आने वाली यह पूर्णिमा भक्तों को आत्मशुद्धि, भक्ति, दान और आध्यात्मिक उन्नति का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा, व्रत, ध्यान और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
भगवान श्रीहरि विष्णु सभी भक्तों को सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करें।
FAQs – ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026
1. ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 को सुबह 11:57 बजे प्रारंभ होकर 31 मई 2026 को दोपहर 2:14 बजे समाप्त होगी।
2. ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु, माता लक्ष्मी और सत्यनारायण भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, सत्यनारायण कथा और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
3. अधिक पूर्णिमा पर दान करने का क्या महत्व है?
अधिक पूर्णिमा पर अन्नदान, वस्त्रदान, दूध, चावल, दही और सफेद वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किया गया दान कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा के क्या लाभ हैं?
- पूजा और व्रत के लाभ
- अधिक मास में क्या दान करें?
- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर क्या दान करें?
- अधिक मास 2026 में क्या नहीं करना चाहिए?
- अधिक मास पूर्णिमा 2026 प्रारंभ समय
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