सुब्रह्मण्य शष्ठी 2025: महत्व, पूजा विधि, व्रत और शुभ मुहूर्त

सुब्रह्मण्य शष्ठी 2025 की तिथि, महत्व, पूजा विधि, व्रत नियम और शुभ मुहूर्त के साथ भगवान कार्तिकेय की विजय का यह पावन त्योहार कैसे मनाएं, और प्रमुख मंदिरों की जानकारी जानें।

सुब्रह्मण्य शष्ठी 2025: महत्व, पूजा विधि, व्रत और शुभ मुहूर्त

सुब्रह्मण्य शष्ठी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान कार्तिकेय (मुरुगन, स्कन्द, सुब्रह्मण्य) को समर्पित है। यह त्योहार मुख्य रूप से मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय ने राक्षस तारकासुर का वध किया था, इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है।

त्योहार का महत्व

सुब्रह्मण्य शष्ठी व्रत रखने से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन में साहस, ज्ञान और आत्मविश्वास की वृद्धि करता है। इसे भगवान कार्तिकेय की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने का उपयुक्त अवसर माना जाता है।

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ जल से स्नान करें।

  • पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें और लाल वस्त्र बिछाएं।

  • भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।

  • केसर, चंदन, पुष्प, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें।

  • मोदक, केला, नारियल, फल और गुड़ चना भोग स्वरूप चढ़ाएं।

  • “ॐ स्कन्दाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

  • संध्या के समय स्कंद पुराण या कार्तिकेय स्तोत्र का पाठ करें।

  • दीपक जलाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

व्रत नियम

  • इस दिन उपवास रखना श्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है।

  • प्याज, लहसुन, मांसाहार और तामसिक वस्तुओं से परहेज करें।

  • व्रत के साथ ब्रह्मचर्य पालन पर विशेष ध्यान दें।

प्रमुख मंदिर और उत्सव

तमिलनाडु के पालानी, तिरुत्तनी, तिरुचेंदूर तथा कर्नाटक के कुक्के सुब्रह्मण्य जैसे प्रमुख मंदिरों में भव्य पर्व मनाया जाता है। यहाँ विशेष पूजा, यज्ञ, भजन-कीर्तन और सोरासम्हारम नामक धार्मिक नाटक होते हैं जो भगवान की विजय का उत्सव मनाते हैं।

सुब्रह्मण्य शष्ठी जीवन में बुराइयों का नाश करने, साहस और ज्ञान की प्राप्ति करने, और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व है। यह व्रत श्रद्धा और भक्ति से रखने पर जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाता है। 2025 में यह पर्व श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और ऑनलाइन भी इसकी पूजा विधि और कथा को लेकर काफी खोज होती है।

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