सोमवती अमावस्या 2026: तिथि, पूजा का समय, व्रत विधि, महत्व और दान के लाभ
सोमवती अमावस्या 2026 15 जून 2026 को अधिक मास में मनाई जाएगी। जानें सोमवती अमावस्या की तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि, महत्व, पीपल पूजा, पितृ तर्पण, दान के लाभ और भगवान शिव-पार्वती की आराधना का धार्मिक महत्व।
सोमवती अमावस्या 2026: तिथि, पूजा का समय, व्रत विधि, महत्व और दान के लाभ
प्रस्तावना
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार (सोमवार) के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना, पितरों के तर्पण, दान-पुण्य तथा आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत और पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवती अमावस्या क्या है?
जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए यह संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन विशेष रूप से:
- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
- सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
- पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा की जाती है।
- पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है।
- पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली सोमवती अमावस्या अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है।
विवरण |
तिथि एवं समय |
सोमवती अमावस्या व्रत |
15 जून 2026, सोमवार |
अमावस्या तिथि प्रारंभ |
14 जून 2026, दोपहर 12:20 बजे |
अमावस्या तिथि समाप्त |
15 जून 2026, सुबह 08:24 बजे |
ब्रह्म मुहूर्त |
सुबह 04:04 बजे से 04:44 बजे तक |
स्नान-दान का शुभ समय |
15 जून 2026 प्रातःकाल |
नोट: उदया तिथि के अनुसार 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा।
सोमवती अमावस्या क्यों मनाई जाती है?
सोमवती अमावस्या का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से:
- पति की दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
- परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
- पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।
सोमवती अमावस्या 2026 के शुभ योग
वर्ष 2026 की पहली सोमवती अमावस्या पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
शुभ योग
- शूल योग – सुबह 08:56 बजे तक
- गण्ड योग – शूल योग के बाद प्रारंभ
- अमृत सिद्धि योग – सुबह 05:45 बजे से शाम 07:08 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 05:45 बजे से शाम 07:08 बजे तक
इन योगों में पूजा-पाठ, जप, दान और धार्मिक कार्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
सोमवती अमावस्या व्रत विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें
प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. व्रत का संकल्प लें
भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
3. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें
पूजा में निम्न सामग्री अर्पित करें:
- जल
- दूध
- बेलपत्र
- अक्षत
- चंदन
- धूप-दीप
- पुष्प
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें।
4. पीपल वृक्ष की पूजा करें
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
- पीपल को जल अर्पित करें।
- दीपक जलाएं।
- कच्चा सूत चढ़ाएं।
- 108 बार परिक्रमा करें।
5. पितरों का तर्पण करें
पूर्वजों की शांति के लिए तिल, जल और कुश से तर्पण करें।
6. दान-पुण्य करें
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें।
सोमवती अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पुत्री के विवाह को लेकर अत्यंत चिंतित था। एक महात्मा ने उसे बताया कि उसकी पुत्री का विवाह तभी संभव होगा जब वह एक पुण्यवती स्त्री सोना धोबन की सेवा करेगी।
ब्राह्मण की पुत्री प्रतिदिन सोना के घर जाकर बिना बताए उसके कार्य करने लगी। उसकी निःस्वार्थ सेवा से प्रसन्न होकर सोना ने उसे आशीर्वाद दिया और उसके मस्तक पर सिंदूर लगाया।
कुछ समय बाद सोना के पति की मृत्यु हो गई। तब उसने पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करते हुए भगवान से प्रार्थना की। उसकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पति को पुनः जीवन प्रदान कर दिया।
तभी से सोमवती अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं तथा पीपल वृक्ष की पूजा करती हैं।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
भगवान शिव की विशेष कृपा
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है, इसलिए इस दिन की गई पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
पितृ तर्पण का महत्व
अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पापों का नाश
पवित्र नदी में स्नान और व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होने की मान्यता है।
अधिक मास का विशेष प्रभाव
अधिक मास में पड़ने के कारण इस सोमवती अमावस्या का पुण्य फल कई गुना अधिक माना जाता है।
सोमवती अमावस्या पर दान का महत्व
सोमवती अमावस्या पर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
क्या दान करें?
- अन्न
- वस्त्र
- फल
- काले तिल
- जल
- गौ सेवा
- दक्षिणा
- गरीब एवं जरूरतमंदों की सहायता
दान करने के लाभ
- पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
- आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
- जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
FAQs
1. सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
सोमवती अमावस्या का व्रत 15 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
2. सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा क्यों की जाती है?
पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु और देवताओं का वास माना जाता है। इसकी पूजा और परिक्रमा करने से सौभाग्य एवं दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
3. सोमवती अमावस्या पर कौन-सा दान करना शुभ माना जाता है?
अन्न, वस्त्र, फल, तिल, जल और दक्षिणा का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. क्या सोमवती अमावस्या पर पितरों का तर्पण किया जा सकता है?
हाँ, अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
सोमवती अमावस्या 2026 अधिक मास में पड़ने के कारण अत्यंत पुण्यदायी और शुभ मानी जा रही है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, पीपल वृक्ष की आराधना, पितरों का तर्पण, स्नान-दान तथा व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए धार्मिक कार्य इस दिन अक्षय फल प्रदान करते हैं।
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