मंगल मूल मंत्र जाप
सनातन धर्म में, मंगल देव (मंगल) को साहस, ऊर्जा, अनुशासन और शक्ति के ग्रह के रूप में पूजा जाता है। वैदिक शास्त्रों में इन्हें कुज, अंगारक और लोहित भी कहा जाता है। नवग्रहों में से एक होने के नाते, मंगल जीवन शक्ति, दृढ़ संकल्प और वैवाहिक सामंजस्य को नियंत्रित करता है। हालाँकि, जब किसी की कुंडली में मंगल पीड़ित होता है, तो यह मंगल दोष (कुज दोष) उत्पन्न करता है, जो अक्सर विवाह में देरी या व्यवधान, रिश्तों में कलह और जीवन में बाधाओं का कारण बनता है।
मंगल मूल मंत्र जाप एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जो मंगल ग्रह को शांत करने, उसके अशुभ प्रभावों को कम करने और उसके सकारात्मक आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
मंगल का वैदिक महत्व
- शक्ति और साहस वीरता, ऊर्जा और दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है।
- विवाह और रिश्ते मजबूत मंगल वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और खुशी सुनिश्चित करता है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा रक्त, सहनशक्ति और चोटों से सुरक्षा को नियंत्रित करता है।
- अनुशासन और सफलता पेशेवर विकास, नेतृत्व और स्थिरता में सहायक।
आध्यात्मिक विचारधारा और कारण
- ऊर्जा संतुलन मंगल अग्नि और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है; जाप आक्रामकता को सकारात्मक शक्ति में संतुलित करता है।
- कर्म शुद्धि वैवाहिक या व्यक्तिगत संघर्षों का कारण बनने वाले कर्म प्रभावों को शांत करता है।
- वैवाहिक आनंद शांति, प्रेम और दीर्घकालिक संबंध लाता है।
- सफलता का मार्ग करियर विकास में सहायक और पेशेवर बाधाओं को दूर करता है।
- दिव्य सुरक्षा भक्तों को नकारात्मक शक्तियों और दुर्भाग्य से बचाती है।
✨ Mahakal.com के मध्यम से, यह पूजा उज्जैन में अनुभवी ब्राह्मणों द्वारा सख्त वैदिक परंपराओं का पालन करते हुए की जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भक्तों को व्यक्तिगत अनुष्ठानों, सामग्री और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ भगवान मंगल का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हो।
शिव मंदिर, उज्जैन