दत्तात्रेय जयंती पर पितृ दोष निवारण पूजा
दत्तात्रेय जयंती पर पितृ दोष निवारण पूजा एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली अनुष्ठान है जो कुंडली में मौजूद पितृ दोष को शांत करने और अपने पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। दत्तात्रेय जयंती को पितृ-संबंधी अनुष्ठानों के लिए सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है क्योंकि भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त ऊर्जाओं के प्रतीक हैं - जो सृष्टि, संरक्षण और परिवर्तन को नियंत्रित करने वाली ब्रह्मांडीय शक्तियाँ हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ दोष तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्माएँ असंतुष्ट रहती हैं या जब उचित सम्मान, श्राद्ध, तर्पण अथवा कर्मकांड पूर्ण रूप से नहीं किया जाता। इसके परिणामस्वरूप जीवन में आर्थिक संकट, विवाह संबंधी समस्याएँ, संतान प्राप्ति में बाधा, सफलता में देरी, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और मानसिक तनाव जैसे प्रभाव देखने को मिलते हैं। दत्तात्रेय जयंती पर किया गया पितृ दोष निवारण अनुष्ठान इन सभी समस्याओं को अत्यधिक प्रभावी रूप से शांत करता है।
Mahakal.com द्वारा अनुभवी वैदिक पंडित आपके नाम और गोत्र के साथ संकल्प लेकर यह पूजा संपन्न करते हैं। आपको पूजा से पूर्व लाइव स्ट्रीमिंग का नोटिफिकेशन भेजा जाएगा और पूजा का पूरा रिकॉर्ड किया हुआ वीडियो बाद में उपलब्ध कराया जाएगा। आपके नाम और पूजा विवरण के साथ एक व्यक्तिगत प्रमाणपत्र भी आपको प्रदान किया जाएगा। पूजा पूर्णत: वैदिक विधि से, योग्य और अनुभवी पंडितों द्वारा संपन्न होती है, तथा पूजा प्रसाद आपके पते पर भेज दिया जाएगा।
दत्तात्रेय जयंती पर पितृ दोष निवारण पूजा का उद्देश्य
- पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना।
- पितृ दोष से उत्पन्न होने वाले कष्टों और बाधाओं का निवारण करना।
- परिवार में आर्थिक समृद्धि, स्वास्थ्य, सौहार्द और शांति की स्थापना करना।
- संतान प्राप्ति में आने वाली देरी और बाधाओं को दूर करना।
- जीवन में उन्नति, सफलता और आध्यात्मिक प्रगति को प्राप्त करना।
- भगवान दत्तात्रेय की दिव्य कृपा, संरक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त करना।
पितृ दोष के प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, पितृ दोष तब पैदा होता है जब पूर्वजों की आत्माएँ संतुष्ट नहीं होतीं या जब उचित श्राद्ध, तर्पण और आदर नहीं किया जाता। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
- संतान प्राप्ति में विलंब या विभिन्न बाधाएँ।
- दांपत्य जीवन में अस्थिरता, तनाव और लगातार मनमुटाव।
- आर्थिक समस्याएँ, धन हानि या करियर में रुकावटें।
- निरंतर स्वास्थ्य समस्याएँ या बार-बार बीमार पड़ना।
- परिवार में अशांति, झगड़े और मानसिक तनाव का वातावरण।
- कार्यों में रुकावटें, सफलता में विलंब और प्रगति का अभाव।
- मानसिक तनाव, चिंता और भावनात्मक असंतुलन।
सिद्धवट, उज्जैन, मध्य प्रदेश