संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ
संकट मोचन हनुमान अष्टक गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक पवित्र स्तोत्र है, जो भगवान हनुमान की स्तुति में गाया जाता है। 1008 बार इस पाठ का आयोजन अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। इससे भक्त को हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
1008 पाठ का महत्व
- आध्यात्मिक महत्व 1008 बार हनुमान अष्टक का जप करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और मन, शरीर व वातावरण शुद्ध हो जाते हैं।
- संख्या का प्रतीक वैदिक परंपरा में 1008 संख्या को पूर्णता और दिव्यता का प्रतीक माना गया है।
- सामूहिक ऊर्जा बड़े पैमाने पर किया गया यह पाठ वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और नकारात्मकता का नाश करता है।
पूजा की विधि
- संकल्प (व्रत) पूजा की शुरुआत भक्त के नाम से संकल्प लेकर की जाती है।
- पाठ का उच्चारण विद्वान पंडित 1008 बार हनुमान अष्टक का पाठ विधिवत करते हैं।
- अर्पण (सामग्री) फूल, सिंदूर, पान के पत्ते, फल, मिठाई और दीपक अर्पित किए जाते हैं।
- आरती और प्रसाद अंत में हनुमान जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा पूर्ण होती है।
यह पूजा क्यों विशेष है ?
- उज्जैन की पवित्र नगरी में, श्री महाकालेश्वर और संकट मोचन हनुमान जी की कृपा से सम्पन्न होती है।
- Mahakal.com द्वारा आयोजित यह विशेष पूजा पूर्ण वेद-विधान, अनुभवी पंडितों और पवित्र वातावरण के साथ कराई जाती है।
- महाकाल.कॉम भक्तों को यह अवसर प्रदान करता है कि वे इस 1008 पाठ महाअनुष्ठान में प्रत्यक्ष या दूर से सहभागी बन सकें।
निष्कर्ष
Mahakal.com के साथ संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ पूजा (1008 पाठ) बुक करने से भक्तों को हनुमान जी की दिव्य कृपा से जुड़ने का सबसे सच्चा और प्रामाणिक माध्यम मिलता है। अनुभवी पंडितों, शुद्ध वैदिक विधि और उज्जैन के पावन वातावरण में कराई गई यह पूजा भक्त को शक्ति, शांति और सुरक्षा प्रदान करती है। महाकाल.कॉम इस अनुष्ठान को विश्वसनीय और सरल बनाता है।
श्री हनुमान मंदिर, उज्जैन