कुंभ विवाह पूजा
कुंभ विवाह पूजा एक अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य वैदिक अनुष्ठान है, जिसे गंभीर अथवा अत्यधिक प्रबल मंगल दोष से प्रभावित जातकों के लिए विशेष रूप से किया जाता है। यह पूजा पूर्णतः व्यक्तिगत आधार पर, जातक के नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और विस्तृत कुंडली विश्लेषण के अनुसार संपन्न की जाती है, जिससे इसका प्रभाव अत्यंत गहन और फलदायी होता है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, जब कुंडली में मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में अत्यधिक प्रभावी स्थिति में होता है, तब मंगल दोष अत्यंत प्रबल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप विवाह में अत्यधिक विलंब, बार-बार रिश्तों का टूटना, दांपत्य भय, मानसिक अस्थिरता, कलह एवं वैवाहिक जीवन में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। ऐसे विशेष मामलों में कुंभ विवाह पूजा को सर्वश्रेष्ठ और शास्त्रसम्मत उपाय माना गया है।
इस पावन अनुष्ठान में मंगल दोष से ग्रसित जातक का कुंभ (पवित्र जल से भरा हुआ मिट्टी अथवा धातु का कलश) से प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। कुंभ को एक निर्जीव एवं शुद्ध आध्यात्मिक माध्यम माना जाता है, जिसके साथ किया गया यह प्रतीकात्मक विवाह मंगल दोष के तीव्र दुष्प्रभावों को पूर्णतः शांत कर देता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक विवाह से पूर्व ही दोष का निवारण हो जाता है, जिससे भावी जीवनसाथी ग्रह बाधाओं से सुरक्षित रहता है।
व्यक्तिगत कुंभ विवाह पूजा में गणेश पूजन, कलश स्थापना, नवग्रह शांति, मंगल शांति मंत्र जाप तथा कुंभ विवाह संस्कार शुद्ध वैदिक विधि-विधान से संपन्न किए जाते हैं। पूजा का समापन पूर्णाहुति, दक्षिणा और आशीर्वाद के साथ होता है, जिससे कुंडली में ग्रह संतुलन स्थापित होता है और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व एवं सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
Mahakal.com द्वारा कुंभ विवाह पूजा का आयोजन पवित्र अंगारेश्वर महादेव मंदिर, उज्जैन में किया जाता है, जो भगवान शिव का वह दिव्य स्थल है जहाँ मंगल (अंगारक) की ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय मानी जाती है। शुद्ध मुहूर्त चयन, अनुभवी वैदिक पंडितों तथा व्यक्तिगत संकल्प के साथ संपन्न यह पूजा गंभीर मंगल दोष निवारण हेतु एक विश्वसनीय, शास्त्रसम्मत और अत्यंत प्रभावी समाधान है, जो जातक के वैवाहिक जीवन को सुरक्षित, संतुलित और मंगलमय बनाती है।