गौरी शंकर रुद्राक्ष एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ रुद्राक्ष है, जिसमें दो रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से आपस में जुड़े होते हैं। यह भगवान शिव (शंकर) और माता पार्वती (गौरी) के दिव्य मिलन का प्रतीक है। सनातन परंपरा में इसे प्रेम, सौहार्द और वैवाहिक सुख प्रदान करने वाला माना जाता है।
✨ धार्मिक महत्व:
पति-पत्नी के बीच प्रेम और समझ बढ़ाता है
विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक
योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति में लाभकारी
स्त्री-पुरुष ऊर्जा (शिव-शक्ति) का संतुलन स्थापित करता है
ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक
🌿 लाभ:
दांपत्य जीवन में मधुरता और शांति लाता है
परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है
मानसिक तनाव और भ्रम को कम करता है
मन को स्थिर और शांत बनाता है
🔱 कौन धारण करें:
वैवाहिक जीवन में सामंजस्य चाहने वाले दंपत्ति
विवाह में देरी या बाधा का सामना कर रहे लोग
संबंधों में सुधार की इच्छा रखने वाले व्यक्ति
आध्यात्मिक साधक
📿 धारण विधि:
सोमवार के दिन स्नान के बाद शुद्ध करके लाल या काले धागे में, या चाँदी/सोने के लॉकेट में गले में धारण करें। धारण करते समय 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
यह पवित्र रुद्राक्ष केवल आभूषण नहीं, बल्कि भगवान शिव-पार्वती की दिव्य कृपा का प्रतीक है, जो जीवन में प्रेम, एकता और आध्यात्मिक जागृति लाता है।
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