कालाष्टमी जुलाई 2026: कब है? तिथि, पूजा विधि, महत्व एवं शुभ मुहूर्त

जानें कालाष्टमी जुलाई 2026 कब है, अष्टमी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, भगवान काल भैरव पूजा का महत्व और व्रत के लाभ।

कालाष्टमी जुलाई 2026: कब है? तिथि, पूजा विधि, महत्व एवं शुभ मुहूर्त

कालाष्टमी जुलाई 2026: कब है? तिथि, पूजा विधि, महत्व एवं शुभ मुहूर्त

परिचय

मासिक कालाष्टमी भगवान काल भैरव, जो भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप हैं, को समर्पित सबसे पवित्र मासिक व्रतों में से एक है। यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन सुरक्षा, बाधाओं से मुक्ति, भय का नाश तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, भैरव मंत्रों का जाप करते हैं तथा काल भैरव मंदिरों में दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जुलाई 2026 में मासिक कालाष्टमी मंगलवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि मंगलवार भगवान भैरव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मासिक कालाष्टमी जुलाई 2026: तिथि

पर्व: मासिक कालाष्टमी

दिनांक: मंगलवार, 7 जुलाई 2026

तिथि

  • कृष्ण पक्ष अष्टमी

  • हिन्दू मास: ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी

मासिक कालाष्टमी जुलाई 2026 शुभ मुहूर्त

मुहूर्त

तिथि एवं समय

अष्टमी तिथि प्रारम्भ

7 जुलाई 2026 – दोपहर 01:24 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त

8 जुलाई 2026 – दोपहर 12:21 बजे

चूंकि भगवान काल भैरव की पूजा परंपरागत रूप से सूर्यास्त के बाद और रात्रि में की जाती है, इसलिए श्रद्धालुओं को 7 जुलाई 2026 को सूर्यास्त के बाद भगवान भैरव की पूजा करनी चाहिए।

मासिक कालाष्टमी जुलाई 2026 क्यों है विशेष?

जुलाई 2026 की कालाष्टमी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह मंगलवार (मंगलवार) के दिन पड़ रही है, जिसे भगवान काल भैरव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार के दिन काल भैरव व्रत रखने से—

  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • शत्रुओं से रक्षा होती है।
  • भय एवं बाधाओं का नाश होता है।
  • न्यायिक एवं आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है।
  • साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • भगवान शिव एवं काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

जो श्रद्धालु किसी कारणवश पूर्व की कालाष्टमी का व्रत नहीं रख पाए हैं, उनके लिए यह मंगलवार की कालाष्टमी भैरव साधना प्रारम्भ करने का अत्यंत शुभ अवसर है।

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भगवान काल भैरव कौन हैं?

भगवान काल भैरव, भगवान शिव के सबसे शक्तिशाली और उग्र स्वरूपों में से एक हैं। उन्हें काल (समय) के स्वामी, धर्म के रक्षक तथा अधर्म एवं बुराई के संहारक के रूप में जाना जाता है।

उनका उग्र स्वरूप क्रोध का नहीं, बल्कि न्याय और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। श्रद्धालु उनकी पूजा नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा, साहस और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए करते हैं।

भगवान काल भैरव का स्वरूप सामान्यतः इस प्रकार दर्शाया जाता है—

  • त्रिशूल धारण किए हुए
  • हाथ में डमरू
  • मुंडमाला धारण किए हुए
  • काला कुत्ता वाहन के रूप में
  • उग्र लेकिन करुणामयी स्वरूप

भगवान काल भैरव को काशी के कोतवाल के रूप में भी पूजा जाता है। मान्यता है कि वे वाराणसी नगरी की रक्षा करते हैं।

मासिक कालाष्टमी व्रत कथा

भगवान काल भैरव की उत्पत्ति से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध कथा शिव महापुराण में वर्णित है।

एक बार भगवान ब्रह्मा को अपने सृष्टिकर्ता होने का अहंकार हो गया। उन्होंने स्वयं को भगवान शिव से श्रेष्ठ बताना प्रारम्भ कर दिया। ब्रह्मा के इसी अहंकार का नाश करने के लिए भगवान शिव ने अपनी एक जटा से भगवान काल भैरव को प्रकट किया।

भगवान काल भैरव ने भगवान ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काट दिया, जो अहंकार और अज्ञान के विनाश का प्रतीक माना जाता है। किंतु ब्रह्मा का सिर काटने के कारण उन्हें ब्रह्महत्या दोष लगा और वे ब्रह्मा का कटा हुआ सिर लेकर समस्त पृथ्वी पर भटकते रहे।

अंततः जब वे काशी (वाराणसी) पहुँचे, तब उन्हें इस दोष से मुक्ति मिली। तभी से भगवान काल भैरव काशी के शाश्वत रक्षक और कोतवाल माने जाते हैं तथा अपने भक्तों को न्याय, साहस और मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने दैत्य दहुरासुर का वध करने के लिए माँ काली का उग्र स्वरूप धारण किया। इसी दिव्य शक्ति से अष्ट भैरव प्रकट हुए, जो समस्त दिशाओं की रक्षा करते हुए धर्म की स्थापना करते हैं।

मासिक कालाष्टमी जुलाई 2026 पूजा विधि

कालाष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए—

1. ब्रह्म मुहूर्त में जागें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान काल भैरव का स्मरण करते हुए श्रद्धा एवं भक्ति से व्रत का संकल्प लें।

3. पूजा स्थल तैयार करें

पूजा स्थान को साफ करें और भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

4. सरसों के तेल का दीपक जलाएं

भगवान भैरव को सरसों के तेल का दीपक अत्यंत प्रिय माना जाता है।

5. पूजा सामग्री अर्पित करें

  • सरसों का तेल
  • लाल पुष्प
  • कुमकुम
  • अक्षत (चावल)
  • नारियल
  • अगरबत्ती
  • काले तिल
  • फल एवं मिठाई

6. भैरव मंत्र का जाप करें

निम्न मंत्रों का 108 बार जाप करें—

ॐ भैरवाय नमः॥

या

ॐ कालभैरवाय नमः॥

7. कालाष्टमी व्रत कथा का पाठ करें

इस दिन व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

8. काल भैरव मंदिर जाएँ

यदि संभव हो तो सायंकाल किसी निकटवर्ती काल भैरव मंदिर में जाकर दर्शन एवं पूजा करें।

कालाष्टमी व्रत रखने के लाभ

श्रद्धा एवं विधिपूर्वक कालाष्टमी व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होने की मान्यता है—

  • भगवान काल भैरव का दिव्य संरक्षण प्राप्त होता है।
  • ग्रह दोष एवं बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
  • पाप एवं नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है।
  • साहस एवं निर्भयता प्राप्त होती है।
  • स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • दुर्घटनाओं एवं अकाल संकटों से रक्षा होती है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आत्मबल बढ़ता है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है।

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निष्कर्ष

मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को पड़ने वाली मासिक कालाष्टमी भगवान काल भैरव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर, विधिवत पूजा-अर्चना कर, भैरव मंत्रों का जाप एवं व्रत कथा का पाठ करने से भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनकी आराधना से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा भक्त आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. जुलाई 2026 में मासिक कालाष्टमी कब है?

मासिक कालाष्टमी मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।

2. जुलाई 2026 की कालाष्टमी की अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी?

अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 को दोपहर 01:24 बजे प्रारम्भ होगी तथा 8 जुलाई 2026 को दोपहर 12:21 बजे समाप्त होगी।

3. कालाष्टमी का क्या महत्व है?

कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित पावन पर्व है। इस दिन उनकी पूजा करने से बाधाओं का नाश, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, साहस, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।

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