शास्त्र-पठन से मन क्यों शांत होता है?

जानिए शास्त्र-पठन से मन क्यों शांत होता है। पवित्र ग्रंथ कैसे तनाव कम करते हैं, भय को श्रद्धा में बदलते हैं और जीवन में शांति, संतुलन व आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।

शास्त्र-पठन से मन क्यों शांत होता है?

भूमिका

आज के युग में मन अशांत है। विचारों का शोर बढ़ गया है, चिंताएँ गहरी हो गई हैं और जीवन की गति ने हमें भीतर से थका दिया है। ऐसे समय में मन को स्थिर और शांति से भर देने वाला सबसे सरल, प्राचीन और चमत्कारी उपाय है—शास्त्र-पठन। भगवद् गीता, रामायण, वेद, उपनिषद, पुराण, या किसी भी पवित्र ग्रंथ का पाठ मन को दिव्य ऊर्जा से जोड़कर उसे शांत, पवित्र और स्थिर बना देता है।

१. शास्त्र हमें दिव्य चेतना से जोड़ते हैं

पवित्र ग्रंथ केवल शब्दों का संग्रह नहीं होते; वे ऋषियों की तपस्या, मंत्रों की शक्ति और दिव्य ज्ञान की ऊर्जा अपने भीतर संजोए हुए होते हैं। उनका पठन करते ही मन ऊँची तरंगों से जुड़ता है और भय, चिंता तथा नकारात्मकता स्वतः विलीन होने लगती है।

२. शास्त्र मानसिक कोलाहल को कम करते हैं

मन अशांत इसलिए होता है क्योंकि उसमें अनगिनत विचार घूमते रहते हैं। शास्त्र जीवन को सरल बनाते हैं, विचारों को दिशा देते हैं और मन को एकाग्र करते हैं। जब मन उलझा हो, शास्त्र-पठन उसे भटकाव से वापस प्रकाश की ओर ले जाता है।

३. भय को मिटाकर श्रद्धा उत्पन्न करते हैं

जीवन का अधिकांश तनाव ‘भय’ से पैदा होता है।
शास्त्र हमें सिखाते हैं—

  • ईश्वर पर विश्वास रखो।

  • कर्म करो, फल की चिंता मत करो।

  • हर घटना किसी उच्च कारण से घटती है।

श्रद्धा बढ़ती है तो भय स्वतः समाप्त हो जाता है, और मन शांत होने लगता है।

४. शुद्ध विचारों का संचार करते हैं

  • नकारात्मक विचार मन को अशांत करते हैं।
  • शास्त्र सत्य, करुणा, धैर्य, सहनशीलता और पवित्रता का संचार करते हैं।

  • जब विचार शुद्ध होते हैं, मन स्वयं शांत हो जाता है।

५. शास्त्र-पठन एक प्रकार का ध्यान है

जब हम कोई पवित्र ग्रंथ पढ़ते हैं, मन बाहरी शोर से हटकर भीतर की ओर मुड़ता है। यह आंतरिक यात्रा ही ध्यान का स्वरूप है।

प्रतिदिन कुछ मिनट का शास्त्र-पठन—

  • तनाव कम करता है।

  • मन को स्थिर करता है।

  • चित्त को निर्मल बनाता है।

  • भावनाओं को संतुलित करता है।

६. कठिन समय में दिशा प्रदान करते हैं

जब जीवन में विपत्ति आती है, हम स्वयं को अकेला समझते हैं। पर शास्त्र बताते हैं कि—

  • संघर्ष सभी के जीवन में आते हैं।

  • देवता और महापुरुष भी परीक्षाओं से गुज़रे हैं।

  • हर समस्या का समाधान धर्म में छिपा है।

  • इससे मनोबल बढ़ता है और धैर्य उत्पन्न होता है।

७. जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं

मन की अशांति का एक बड़ा कारण है—जीवन में दशा का अभाव।
शास्त्र हमें बताते हैं—

  • कैसे जियें ?

  • कैसे सोचें ?

  • कैसे निर्णय लें ?

  • कैसे संयम रखें ?

  • कैसे शांत और संतुलित रहें ?

अर्थपूर्ण जीवन हमेशा शांत होता है।

८. हमें आत्म स्वरूप से जोड़ते हैं

मन अशांत इसलिए है क्योंकि वह अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गया है। शास्त्र हमें आत्मा की स्मृति दिलाते हैं—

"तत्त्वमसि — तुम वही दिव्य सत्ता हो।"

यह स्मृति मन को गहरी शांति प्रदान करती है।

निष्कर्ष

शास्त्र-पठन केवल अध्ययन नहीं—मन का उपचार, आत्मा का शोधन और जीवन की दिशा है। प्रतिदिन कुछ मिनट का पाठ मन को शांत, स्थिर और प्रसन्न बना देता है।

मन को शांत करना हो, जीवन को बदलना हो, या दिव्य कृपा प्राप्त करनी हो — आज ही किसी पवित्र ग्रंथ का पाठ आरंभ कीजिए।

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