ज्ञान से भी महान गुरु क्यों माने जाते हैं?
सनातन धर्म में गुरु को ज्ञान से श्रेष्ठ क्यों माना गया है, जानिए गुरु तत्व, आध्यात्मिक विवेक और आत्मज्ञान के सच्चे मार्ग का महत्व।
सनातन दृष्टिकोण
परिचय
आज बहुत से लोग यह प्रश्न करते हैं— गुरु को ज्ञान से भी महान क्यों कहा गया है? सनातन धर्म में यह विचार अत्यंत गूढ़ और व्यावहारिक है। ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन ज्ञान को जीवन में उतारने की शक्ति गुरु से ही मिलती है।
इसी कारण गुरु को ज्ञान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है।
ज्ञान और गुरु में मूल अंतर
ज्ञान जानकारी देता है, गुरु दिशा देते हैं। ज्ञान बुद्धि को तेज करता है, गुरु विवेक जाग्रत करते हैं।
गुरु के बिना ज्ञान :
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अहंकार को जन्म दे सकता है।
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भ्रम उत्पन्न कर सकता है।
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अधूरा और असंतुलित रह जाता है।
सनातन धर्म में गुरु का सर्वोच्च स्थान
सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर के समान माना गया है। प्रसिद्ध श्लोक—
“गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु
गुरुर देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः”
यह दर्शाता है कि गुरु सृष्टि, पालन और परिवर्तन तीनों के प्रतीक हैं।
गुरु के बिना ज्ञान क्यों अधूरा है ?
गुरु शिष्य को :
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शास्त्रों का सही अर्थ समझाते हैं।
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आत्मिक अनुशासन सिखाते हैं।
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अहंकार से बचाते हैं।
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जीवन में संतुलन प्रदान करते हैं।
गुरु अज्ञान का नाश कैसे करते हैं ?
गुरु शब्द का अर्थ ही है— अंधकार को दूर करने वाला। अज्ञान केवल जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सत्य की गलत समझ है। गुरु शिष्य को आत्मज्ञान की ओर ले जाकर इस अज्ञान को नष्ट करते हैं।
आधुनिक जीवन में गुरु तत्व का महत्व
आज जानकारी बहुत है, लेकिन दिशा कम है। ऐसे समय में गुरु जीवन को सही मार्ग प्रदान करते हैं—चाहे वह करियर हो, संबंध हों या आध्यात्मिक विकास।
निष्कर्ष
ज्ञान मन को भरता है, लेकिन गुरु जीवन को गढ़ते हैं। इसी कारण गुरु को ज्ञान से भी महान माना गया है। गुरु केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि जीवन को सार्थक बनाते हैं।
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