मोक्षदायिनी शिप्रा महा दीपदान
कार्तिक मास के अति-पावन समय में उज्जैन स्थित ऐतिहासिक रामघाट पर दीपदान करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन एवं फलदायी मानी गई है। इस चढ़ावे के अंतर्गत श्रद्धालु के नाम और गोत्र का शास्त्रोक्त विधि से संकल्प लेकर रामघाट की पवित्र शिप्रा धारा में 11, 21 या 51 मिट्टी के दिए (दीपक) प्रवाहित किए जाते हैं। इन दीपकों में शुद्ध देसी गाय का घी अथवा तिल का तेल और रुई की बत्ती का उपयोग होता है, जिन्हें माँ शिप्रा का जल, अक्षत, पुष्प, कुमकुम और रोली से पंचोपचार पूजन करने के पश्चात प्रज्वलित किया जाता है। रामघाट की विश्व प्रसिद्ध भव्य संध्या शिप्रा महाआरती की दिव्य वेला में यह दीपदान संपन्न कराया जाता है, जिससे संपूर्ण तट दीपों के आलोक से जगमगा उठता है और जातक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
महत्व
कार्तिक मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ माना गया है और इस दौरान पवित्र नदियों में दीपदान का फल अक्षय होता है। रामघाट वही पावन स्थान है जहाँ भगवान श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंड तर्पण किया था। इस पवित्र तट पर कार्तिक मास में दीपदान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के कष्ट मिटते हैं और घर में प्रकाश, पवित्रता व सात्विकता का वास होता है।
आध्यात्मिक महत्व
अध्यात्मिक दृष्टिकोण से दीपक की लौ ज्ञान और आत्मा का प्रतीक है, जबकि नदी का जल जीवनधारा का प्रतीक है।
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मोक्ष का मार्ग: जल में बहता हुआ दीपक जीव के मोक्ष मार्ग को आलोकित करता है।
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महाकाल की अनुकंपा: उज्जैन काल गणना और महाकाल की नगरी है; यहाँ रामघाट पर दिया गया दीपदान काल (अकाल मृत्यु व कष्ट) के चक्र से मुक्ति दिलाता है।
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अमृत तत्व का प्रभाव: समुद्र मंथन के दौरान शिप्रा में झड़े अमृत कणों के कारण कार्तिक मास में यहाँ दीप प्रज्वलित करने से आंतरिक शुद्धि और आत्मिक जागृति होती है।
चढ़ावे के लाभ
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पितृ दोष से मुक्ति: रामघाट पर कार्तिक दीपदान करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष शांत होता है।
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अकाल मृत्यु व भय का नाश: भगवान महाकाल और माँ शिप्रा के आशीर्वाद से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
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सुख-समृद्धि एवं आरोग्य: घर में धन, आरोग्य, और मानसिक शांति का आगमन होता है।
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पापों का क्षय: कार्तिक मास में किया गया एक दीपदान सौ वज्रपेय यज्ञों के समान पुण्य फल प्रदान करता है।
चढ़ावे का निष्कर्ष
रामघाट पर कार्तिक मास का दीपदान केवल एक धार्मिक रीति-रिवाज नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव का एक माध्यम है। माँ शिप्रा की पावन लहरों पर जगमगाते दिए मनुष्य के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर उसे सुख, शांति और मोक्ष की ओर ले जाते हैं।