सिद्धवट दूध अर्पण
उज्जैन स्थित पावन सिद्धवट को देश के प्रमुख अक्षय वटों में गिना जाता है। पुराणों के अनुसार, इसका रोपण माता पार्वती ने स्वयं अपने हाथों से किया था। यहाँ पितृ दोष निवारण, पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सिद्धवट पर अर्पित किया जाने वाला दूध सीधे पितरों तक पहुँचता है, जिससे उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है और उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
आध्यात्मिक महत्
माता पार्वती का आशीर्वाद: यह वटवृक्ष माता पार्वती द्वारा लगाया गया है, इसलिए इसकी पूजा करने से आदि शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पितृ ऋण से मुक्ति: हिंदू धर्म में पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए सिद्धवट को गया और त्र्यंबकेश्वर के समान अत्यंत पवित्र माना गया है। यहाँ दूध चढ़ाने से पितृ दोष शांत होता है।
मोक्ष का मार्ग: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से पूर्वजों की भटकती आत्माओं को शांति मिलती है और वे बैकुंठ धाम को प्राप्त होते हैं।
चढ़ावे के लाभ
वंश वृद्धि और सुख-शांति: पितरों की कृपा से परिवार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि एवं वंश की वृद्धि होती है।
मानसिक शांति: पितृ दोष और पूर्वजों की अतृप्ति के कारण जीवन में आने वाले मानसिक तनाव व बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
अक्षय पुण्य: इस पावन स्थल पर दूध अर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।