The Bhasma Aarti is considered the most divine and extraordinary ritual dedicated to Lord Shri Mahakaleshwar. Performed daily during the *Brahma Muhurta* (the auspicious pre-dawn hours) this *Aarti* is a focal point of faith for hundreds of thousands of devotees.
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राजमहेन्द्रवरम,
Andhra Pradesh,
India
खुलने का समय : 06:00 AM - 07:30 PM
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सर्वशैल शक्तिपीठ के बारे में
जब भगवान विष्णु ने देवी सती के शव को 51 भागों में विभाजित करके पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैलाया, तो माना जाता है कि देवी सती के गाल इस स्थान पर गिरे थे। जिन स्थानों पर सती के शरीर के अंग गिरे, उन्हें पवित्र माना जाता है और शक्ति पीठ के रूप में पूजा जाता है।
क्या अपेक्षा करें?
सर्वशैल शक्ति पीठ आध्यात्मिक रूप से उत्थान का अनुभव प्रदान करता है। दिव्य वातावरण में डूब जाएँ, आकर्षक अनुष्ठानों को देखें और जटिल वास्तुकला की प्रशंसा करें। मंदिर का शांतिपूर्ण वातावरण और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन समग्र अनुभव को बढ़ाते हैं।
टिप्स विवरण
सर्वशैल शक्तिपीठ के बारे में अधिक जानकारी
मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया, इसके बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं है। जब भगवान विष्णु ने देवी सती के शव को 51 भागों में विभाजित करके पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला दिया, तो माना जाता है कि देवी सती के गाल इस स्थान पर गिरे थे। जिन स्थानों पर सती के शरीर के अंग गिरे, उन्हें पवित्र माना जाता है और शक्ति पीठ के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर मुख्य रूप से देवी सती को समर्पित है, जिन्हें यहाँ 'विश्वेश्वरी' और 'राकिनी' (जिसे विश्वमतुका या विवेशी के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में स्थापित किया गया है। भगवान शिव को 'वत्सनाभ' या 'दंडपाणि' के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सती का बायाँ गाल इसी स्थान पर गिरा था।
मंदिर ज्ञात
समय
प्रवेश शुल्क
टिप्स और पाबंदियाँ
सुविधाएँ
समय की आवश्यकता
सर्वशैल शक्तिपीठ कैसे पहुंचे ?
सर्वशैल शक्तिपीठ सेवाएँ
सर्वशैल शक्तिपीठ आरती का समय
पर्यटक स्थल
सर्वशैल शक्ति पीठ के पास देखने योग्य स्थान
सर्वशैल शक्ति पीठ के निकट अन्य धार्मिक स्थल
सर्वशैल शक्तिपीठ की स्थानीय भोजन विशेषता
Parul
Kabir Shah
Ravindra Jain
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